Sushil Kumar's Blog

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असत्यमेव ज्यादा जयते?

आजकल इंटरपास (या फेल?) आमिर खान डॉक्टरों को निशाना बना रहे हैं। २००४ में कीटनाशक विवाद के दौरान वो टीवी विज्ञापन में कोका कोला की फैक्ट्री का भ्रमण करा रहे थे और ये फरमा रहे थे कि विवाद महज बकवास है और कोका कोला सेफ है। संसद में कई दिनों तक बहस चली, और बात जब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची तो रसायन शास्त्र में लगभग अनपढ़ नेता और जज ये तय नहीं कर पाए कि कोका कोला को किस श्रेणी में रखा जाये – फ़ूड या वाटर? जब बात उनके पल्ले नहीं पड़ी तो बात आई-गई हो गई। सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरेंमेंट की सारी रिपोर्ट धूल चाटने पर मजबूर कर दी गयीं। एक वैज्ञानिक सुनीता नारायण का कद छोटा साबित करने के लिए गुलाबी अख़बार रोज इंदिरा नूयी के गुण गाने लगे। पेप्सी और कोका कोला उन दिनों पांच ₹ में बिकने लगा था। आमिर खान बॉलीवुड के सम्मानित सितारे हैं, कुशल कलाकार हैं, सरदार सरोवर डैम प्रसंग के बाद से उनका एक्टिविस्ट का नया चेहरा भी सामने आया। हमारी उनके साथ सहानुभूति रही, उनकी फिल्म गुजरात में बैन की गई इसका खेद भी रहा। उन्होंने ‘तारे ज़मीन पर’ बना कर दर्शकों को अपनी निर्देशकीय प्रतिभा से अवगत कराया। फिल्म बेहद अच्छी थी और बच्चों को चूहा दौड़ में शामिल न करने को अभिभावकों के प्रति सन्देश सफलता पूर्वक पहुंचाने में कामयाब रही। वो मंझे हुए कलाकार हैं, साल में एक या दो ही फिल्म बनाते हैं, अब रीयलटी शो में हाथ आजमा रहे हैं। दर्शकों को रुलाने पर वो कामयाब रहे हैं और गूगल पर उनका शो उनके नाम से भी ज्यादा रिसल्ट दे रहा है।
मैं उनका शो नहीं देखता, ऐसा नहीं है कि घर में टीवी नहीं है, या फिर केबल नहीं है। उनका पहला शो कन्या-भ्रूण हत्या पर था, लगभग दो हफ्ते तक मैंने वो शो नहीं देखा, फेसबुक और अख़बार से मालूम चला कि आमिर खान क्रांति की नई बयार चला रहे हैं। जब तसलीमा नसरीन ने भी आमिर खान के शो पर प्रश्न-चिन्ह उठाया तो मैंने सोचा कि देखें आखिर इस शो में क्या है, तब मैंने यू-ट्यूब में उस शो को देखा और यकीन मानिये इस तरह के शो बहुत ही शातिर दिमाग के लोग बनाते हैं, कुछ पल को मैं भी भावुक हो गया था लेकिन ये सब क्षणिक था। जब आप आंसू बहा रहे होते हैं तो वो अपना मुनाफा काट रहे होते हैं। क्या अधिकांशतः लोग इस मुद्दे से पहले वाकिफ़ नहीं थे? अगर थे तो आमिर खान की वाहवाही करने से पहले उनको ये भी सोचना चाहिए था कि वो खुद सो क्यूँ रहे थे, गंभीर सामाजिक मुद्दों से लोग खुद ही उदासीन रहते हैं। उस शो में नया कुछ भी नहीं दिखाया गया फिर भी उस शो ने TRP के सारे कीर्तिमान तोड़ दिए, क्या दर्शकों को सनसनी पसंद है? या फिर स्टार-कास्ट?
एक शो में डॉक्टरों की खिचाई की गई, वो शो मैंने नहीं देखा है, मालूम पड़ रहा है कि देश भर के डॉक्टर लामबंद हो रहे हैं आमिर खान के खिलाफ, इसका एक पहलू ये भी है कि आप विवाद खड़ा करें और मुफ्त की पब्लिसिटी बटोरें।
देश ने कई तरह के रीयलटी शो देखें हैं, उत्कृष्ट गायक, उत्कृष्ट नृतक, रीयलटी शो का स्वयंवर, रीयलटी शो की बहू, रीयलटी शो के प्रेमी-प्रेमिका, रीयलटी शो के अभिभावक। लेकिन आमिर खान अब रीयलटी शो में दफ़न पड़े मुद्दे उठा रहे हैं। किसानों की आत्महत्या को दहेज से जोड़ रहे हैं, डॉक्टरों को दवा कंपनियों के हाथों बिका हुआ दिखाया जा रहा है और दर्शक मुग्ध हैं कि कोई तो बहादुर आया जो ऐसे मुद्दे उछाल रहा है। लेकिन इसमें बहादुरी की कोई बात नहीं है ये सब शुद्ध व्यापार है। तुम मुझे अपना गैर-कीमती वक़्त दो, अपने आंसू दो और हम अपना बैंक बैलेंस बढ़ाएं – दोनों हाथ में लड्डू!

यही मुद्दे नलिनी सिंह पिछले बीस साल से अपने कार्यक्रम – ‘आँखों देखी’ में उठा रही हैं, क्या आपने जानना चाहा कि नलिनी सिंह क्या बोलती हैं, नहीं, क्यूँकि वो स्टार नहीं हैं। आप अपने आंसू तभी बहायेंगे जब आमिर चाहेंगे, नहीं तो नहीं। नलिनी सिंह सरकारी दूरदर्शन तक सिमट कर रह गई हैं, काश वो भी समाचार बेचने को व्यापार बना पातीं तब आप उनको देखते। क्यूँ? सच बात यही है न।
© सुशील कुमार
Doctors want Aamir Khan to apologise after Satyamev Jayate episode

http://www.dnaindia.com/entertainment/report_doctors-want-aamir-khan-to-apologise-after-satyamev-jayate-episode_1696485

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12 thoughts on “असत्यमेव ज्यादा जयते?

  1. आपका लेख पढ़ा, मै पूरी तरह सहमत हूँ.
    कन्या भ्रूण हत्या वाला शो मैने देखा था, यह मुद्दा किसी से भी छुपा नहीं है, हाँ…. आमिर खान साहेब ने उस दिन लोगो को रुला कर खूब वाह वाही लूटी जबकि कन्या भ्रूण हत्या पर न जाने कितने कार्यक्रम आये हैं.
    उस दिन का शो तो फिर भी कुछ हद तक ठीक भी था पर गए रविवार वाला शो बिलकुल भी ठीक न था, आखिर आमिर खान के पास क्या credentials है जो वोह ऐसे मुद्दों पर बहस करें ?
    उनके शो में कुछ लोग तो रोने के लिए पूरी तरह trained रहते हैं. यह सब टी आर पी का खेल है… आमिर खान अपने फीस के नाम पर एक मोटी रकम ले रहे होंगे और स्टार टीवी वाले एक अच्छी कमाई कर रहे होंगे.
    हम जनता हमेशा की तरह बेवकूफ ही बनते हैं.

  2. MAHADEVA S SARMA on said:

    कलजुगी है भई कलजुगी असत्य को ही जीतना है.. सत्य शायद जीतेगा लेकिन बहुत देरी से..

  3. लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद्, भारत की जनता अद्वितीय है, उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों जैसे इलाहाबाद, मुरादाबाद, रामपुर में पोलिओ की दवा पिलाने गए हेल्थ वर्करों को पीटा जाता है, पत्थर बरसाये जाते हैं और कहीं-कहीं तो बंधक भी बना लिया जाता है, यहाँ की जनता ही ऐसी है, कन्या के जन्म के बाद अगर उसको दूध के बर्तन में डुबो के मार दिया जाये या ज़िन्दा दफ़न कर दिया जाये तो क्या उसके लिए भी डॉक्टर जिम्मेदार हैं?
    दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को घूस देने पर मैं यही कहना चाहूँगा कि वो डॉक्टर कम-से-कम भारत में रह कर प्रेक्टिस तो कर रहे हैं, विदेश पलायन तो नहीं कर गए जैसे हर साल चार हज़ार डॉक्टर करते हैं। वैसे भी चाणक्य ने कहा है कि किसी की जिह्वा पर मधु रखोगे तो उसको मधु का स्वाद चखने से रोका तो नहीं जा सकता।
    बेहतर होगा कि आमिर खान फिल्म इंडस्ट्री के काले कारनामे उजागर करें और डॉक्टरों को बख्श दें।

  4. Moti Lal on said:

    achchha likhate ho aap …..aap bhee TRP banane ke chakkar main to nahi

    • एक बात जो मुझे बहुत अधिक विचलित करती है वो ये कि अगर आप ‘अन्ना-आन्दोलन’ पर प्रश्न-चिन्ह लगाओ तो देश-द्रोही और भ्रष्ट और दिग्विजय के चमचे; और अगर आप आमिर खान के रुलाऊ शो पर सवाल खड़े करो तो पत्थरदिल और नारी-विरोधी, इस देश में हर कोई बोलना चाहता है लेकिन कोई किसी की सुनना नहीं चाहता, बड़ी विडम्बना है ये

  5. There is no such thing as right or wrong. The point is that action is objrctive or not. If idea of programme is to keep people informed of alternatives, it does serve the purpose. Merely because Aamir Khan is making money from it and over acts by crying, is besides the point. People do not go to temple without promise of parshaad or lungar. Aamir Khan as an admittedly promiscous person, has more expences to cover.
    Lets wait and criticize when he over does it. He will. Due to his educational background and lack of proper research on complex issues or directive.

  6. To blame doctors for female foeticide is similar to blame William Nelson Beck – discoverer of Ultrasound! It is fact that India has screwed sex-ratio because of female foeticide but to give credit to doctors for this anomaly is a prejudiced opinion. Doctors are as good or bad as other professionals, they are not God or their representatives, and they don’t go to every home enticing to abort their female foetuses.

  7. From a wall posting of a Facebook user, Hitesh Budhiraja –
    “Since last few days we have seen viral effect across the nation for a television show hosted by Bollywood Star Amir Khan named “Satyamev Jayate” and these days I’ve come across a large number of people discussing and praising the show and also some of them were considering making donations and sending SMSs to the show in public interest, my purpose for writing this post is to let those people know that how and where their donations and revenue generated by SMSs will be used. The foundation where your donations and income via SMSs will go is called “Humanity Trust” and this is the website of this trust http://www.humanitytrust.com/ this website says that objective of their foundation is :- Masjid Construction assistance. (Bore/construction helps) :- Placement assistance for Islamic youngsters (notifications about jobs across various geographies) {do visit this website and check yourself} Now look at the Irony here, people from all over the country belonging to different religions and communities are sending SMSs and making donations, and you can see clearly that money is spent on people of just one particular community and religion. Now isn’t it unfair that first you are attracting the people from different religion on emotional grounds, and when they fall prey to it and gives donation, you are using that money for communal purpose without even informing the people where their money is going to be used.”

  8. I am not concerned with how much money Aamir Khan is making by this show or how much TRP has been generated. I am also his fan but he should not resort to cheap publicity stunts by bashing doctors, at least two of his TV show portrayed doctors in poor light. I will be more than happy if his tear-jerking show stops a single incident of female foeticide but to blame only doctors for this social evil is a concocted opinion.

  9. i liked it !!!!!!

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