Sushil Kumar's Blog

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अपनी अपनी मूँछ

छवि चित्र साभार: www.funzug.com

छवि चित्र साभार: http://www.funzug.com

एक धार्मिक संस्था ‘अ’ को मूँछवालों से बड़ी परेशानी होने लगी। उन्हें लगा दढ़ियल ब्रह्मा ने फजूल में आदम जात के मुख पर मूँछ उगा रखी है और ये किसी काम की भी नहीं है। प्रलय के समय जब वैतरणी नदी में सब डूब रहे होंगे तब बेल-मुंड खोपड़ी पर उगी हुई चोटी पकड़ कर यमदूत उन्हें बचा लेंगे। अब ऐसी चोटी मुँह पर आती नहीं है इसलिए मूँछ का उगना ही व्यर्थ है। ऐसा माना गया और फिर इस धारणा पर ठप्पा लगा दिया गया।
एक धर्म ‘ब’ ने कहा कि मूँछ बड़ी फजूल की चीज़ है। चार बीवियों में से तीन को अधरपान करते समय मूँछ बड़ी वाहियात चीज़ लगती। इसलिए मूँछ उड़ा दी गई। लेकिन इस धर्म में आदम जात के निर्माता भी दढ़ियल थे इसलिए ढ़ाई हथेली लम्बी दाढ़ी को बुर्के की तरह आदमी के मुँह पर थोप दी गई ताकि बुरी नज़रों वालीं औरतों का दिल दाढ़ी वालों पर फ़िदा न हो। और फिर उस दाढ़ी पर सुर्ख लाल रंग लबरेज कर दिया गया ताकि वे दूर से ही शादी-शुदा नज़र आयें और गली-कूचे की कुँवारी कन्याएँ बेफिक्र हो घूम सकें।
एक और धर्म ‘स’ ने कहा कि दाढ़ी-मूँछ किसी भी अंग-प्रत्यंग की हों इसका उगना जरुरी है और चूँकि हमारे हाथ में कंघा दिया गया है और दाढ़ी-मूँछों के बिना कंघा बोर होता रहता है और सर के हेलमेट पर कंघा फेरने से इसे बालों का स्वाद भी नहीं मिलता। कमाल की बात ये निकली कि इस धर्म के निर्माता भी घनी दाढ़ी-मूँछ वाले थे।
सभी धर्म एक दूसरे से श्रेष्ठ थे – ऐसा कहा गया और फिर ऐसा सुनने में भी आया और ऐसा मान भी लिया गया। फिर धीरे-धीरे कस्बे के नाईं ‘अ’ और ‘ब’ के लिए बँट गये। आपसी मनमुटाव से उनकी दुकानें दूर हो गईं। इन सबसे बेफिक्र ‘स’ धर्म वाले अपनी दाढ़ी में कंघा फेर-फेर कर जुएं बिनते रहे।
© सुशील कुमार

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14 thoughts on “अपनी अपनी मूँछ

  1. wow!look at that beard.how does it stand like that ?hairspray?

  2. MAHADEVA S. SARMA on said:

    कहीं न कहीं धर्म को अपना छाप छोडना था, वैसे ‘अ’ धर्म वालों की तो अपने-अपने उपभेदों को लेकर अच्छी चित्रकारी के अवसर प्राप्त हैं, बाकी धर्मों को दाढी मूँछों से काम निकालना है….

  3. अगर मैं ये जानता , मुछ रखे दुःख होय
    नगर ढिंढोरा पिटता , मुछ न रखियो कोई
    प्रभुजी आपके मुछ का सवाल है, छोरना मत

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