Sushil Kumar's Blog

straight from my heart and soul

हिरणी

Old lady crossing street

क्या आपने किसी बुढ़िया को
सड़क पार करते देखा है?
शरीर से असमर्थ
दौड़कर, हिरणी की भाँति
कुलाँचे भरती हुई
पार करती सड़क
और बाद इसके देखती ऊपर
असीम ईश्वर को
देती धन्यवाद्
दोनों हाथों से बजाती गाल
अईयो !
सड़क पार कर लिया मैंने

© सुशील कुमार

छवि साभार : http://www.redbubble.com/people/sanchezisdead/works/976450-old-lady-crossing-the-street-at-8-00-am-at-milano

* कुछ रूपक :
बुढ़िया –  नश्वर भौतिक देह
सड़क –  भवसागर
हिरणी – साधक/साधिका
गाल बजाना – पश्चाताप

बूढ़े ATM

ATM
दिल्ली से लेकर
चेन्नई तक
छोटे-छोटे शहरों में
क़स्बों में
बिखरे हैं
बेतरतीब ATM …
दक्षिण भारत के सुदूर
तंजावुर, तिरुवण्णामलई
कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली
या फिर उत्तर भारत का
कोई सा भी छोटा-बड़ा शहर …

ATM में मुस्तैद,
ऊँघते,
सुस्ताते
जीवन भर की धूप-छाँव
अपनी आँखों में समेटे,
हथेलियों के बीच
रगड़ते खैनी और चूना
नीली वर्दी में
देश के वरिष्ठ नागरिक
… बूढ़े गार्ड
उम्र की ढलान में
कुछ लाख रुपयों की
रक्षा करते बूढ़े गार्ड

ये ATM
क्या नए युग के
ओल्ड ऐज होम हैं?
जहाँ बूढ़ा गार्ड
अपने बेटे-बहु
से छिपकर,
झगड़ालू बीवी
से बचकर
तलाशते हैं छत
या फिर
अपनी उदासी
की ज़मीन?

ये बूढ़े ATM
उगलते नोट
और तलाशते
चंद पल की
खामोशियाँ

© सुशील कुमार

Oh God! You are a Thug

DSCN0534

Was cheated
by God.
When I asked
about mercy,
He enslaved me.
When I asked for joy,
He gave me pain.
When I craved to listen
the sweet voice of my beloved,
He embolden me
to forget her forever.
When I asked wealth,
He showed me penury.
When I asked for God Himself,
He killed my Self.

© Sushil Kumar

अच्छे दिन

UPA - III छवि साभार: शेखर गुरेरा

UPA – III छवि साभार: शेखर गुरेरा


कडु दवा खवाए के
मोदी करें उपचार
रेल करावा बढ़ गवा
अच्छे दिन अबकी बार
ओ भैया अच्छे दिन इस बार
दरोगा कटहल चोर पकरें
नेता करें बलात्कार
जनता करे हाहाकार
बिजली गई, पानी गया
आँखों से इस बार
अच्छे दिन आ गए
मोदी के इस बार
तेल पियें अडानी का
अंबानी को बनी गैस
सूँघे मोदी सरकार
अच्छे दिन आ गए
मोदी के इस बार
महँगाई जब सताए तो
पियें नमो-टी हर बार

© सुशील कुमार 

Why They Hate Each Other: Behind the Sunni-Shi’ite Divide

Sushil Kumar:

Why Shia-Sunnis hate each other?

Originally posted on TIME:

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It has come to this: the hatred between Iraq’s warring sects is now so toxic, it contaminates even the memory of a shining moment of goodwill. On Aug. 31, 2005, a stampede among Shi’ite pilgrims on a bridge over the Tigris River in Baghdad led to hundreds jumping into the water in panic. Several young men in Adhamiya, the Sunni neighborhood on the eastern bank, dived in to help. One of them, Othman al-Obeidi, 25, rescued six people before his limbs gave out from exhaustion and he himself drowned. Nearly 1,000 pilgrims died that afternoon, but community leaders in the Shi’ite district of Khadamiya, on the western bank, lauded the “martyrdom” of al-Obeidi and the bravery…

View original 4,375 more words

बोलबचन

छवि साभार: http://mysay.in/category/stay-fit/

छवि साभार: http://mysay.in/category/stay-fit/

एक बाबा जी बड़ा दिव्य प्रवचन सुना रहे थे, पंडाल खचाखच भरा हुआ था, हज़ारों की भीड़ थी, भक्तजन बड़ी श्रद्धा से काफ़ी देर से प्रवचन सुन रहे थे। प्रसादम का टाइम होने से पहले ही पिछली कतार के भक्त सरकने लगे। सरकते सरकते सारे भक्त सरक लिए लेकिन बाबा जी प्रवचन निर्बाध गति से सुनाते रहे। जब अंत में दो लोग ही पंडाल में बचे रह गए तो बाबाजी बड़े प्रसन्न होकर बोले – तुम लोग बड़े शुद्ध भक्त हो, धर्म की पताका तुम जैसे भक्तों की वजह से लहराती है, मैं बहुत खुश हूँ कि तुम दोनों ने पूरा प्रवचन सुना।
दोनों भक्त हाथ जोड़कर झेंपते हुए बोले बाबाजी हम टेंट वाले हैं, बड़ी देर से आपका प्रवचन ख़तम होने का इंतज़ार कर रहे थे। तंबू उखाड़ना है!
© सुशील कुमार

असली गाँधी – नकली गाँधी

Imageबहुत से बुद्धूजीवी गाँधी बाबा के सत्य के प्रयोग, उनके ब्रह्मचर्य पर किये गए प्रयोगों से जोड़ कर देखते हैं, लेकिन गाँधी बाबा ने ये प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में 22 साल किये, इंग्लैंड में भी किये और भारत में भी अपनी अंतिम सांस तक किये। कुछ लोगों ने गाँधी बाबा के अनशन और सविनय अवज्ञा आंदोलन का चीप संस्करण निकालना चाहा, दांडी-यात्रा में नमक बना कर क़ानून तोड़ने की नक़ल बिजली के तार जोड़ कर की, जनता के बीच जनमत संग्रह कराया लेकिन सत्य के प्रयोगों से मात्र तीन साल में ही उकता कर एक से बढ़कर एक सफ़ेद झूठ बोले, बच्चों की झूठी कसमें खायीं, गाँधी बाबा के लंगोट की तरह मामूली आदमी की तरह मफ़लर लपेटा लेकिन सब व्यर्थ गया, तीन साल के सत्य के प्रयोगों में तीस साल के सत्य के प्रयोगों के तप का बल न था।
गाँधी बाबा ने अपने रसूख़ का बेजा इस्तेमाल नहीं किया, न आज़ाद भारत की सत्ता भोगी और न चंदे के पैसों को अपनी तिज़ोरी में ठूँसा। ग़ैर-बुद्धूजीवी कट्टर हिन्दू गाँधी बाबा को इसलिए कोसते हैं क्यूंकि उन्होंने बंटवारे के बाद मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोका और हिन्दुओं द्वारा मुसलमानों का जी भर कर क़त्ल-ए-आम करने से रोका और इसके लिए अनशन तक किया। उग्र ब्राह्मण इस बात का गर्व भी करते हैं कि इस गाँधी बाबा को एक ब्राह्मण ने ही वध किया, वध शायद राक्षसों का किया जाता है या फिर पशुओं का।
उधर बाबा रामदेव ने ख़ुद को चुनावी नतीज़े के तीसरे दिन बाद ही अपनी तुलना गाँधी बाबा से की है, गाँधी बाबा एक व्यावसायिक घराने से थे लेकिन ख़ुद कभी धन्धा नहीं किया, वकालत की, जन-आंदोलन चलाया, भारत माता की जय के साथ ही महात्मा गाँधी की जय का स्वतंत्रता सेनानी हुंकार भरते थे।
गाँधी बाबा ने अंग्रेजी हुकूमत से अहिंसात्मक लड़ाई लड़ी, अंग्रेज़ों को कभी कटुवचन नहीं बोले, कोई गाली-गलौज नहीं, कोई ग़िला-शिक़वा नहीं, हमेशा मर्यादा में रहे। 31 साल तक सत्याग्रह आंदोलन चलाया, आंदोलन हिंसक होने पर आंदोलन रद्द भी कर दिया, कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई, कभी किसी सेना बनाने की बात नहीं की, किताब लिखी, एक-एक पत्रों के ज़वाब रोज़ सुबह चार बजे उठ कर लिखे, तीन समाचारपत्र भी चलाये। दक्षिण अफ्रीका से आने के बाद भारत के गाँव-गाँव भ्रमण किया, देश को जाना-समझा, कतार में खड़े आखिरी आदमी का दर्द समझा, लेकिन अपनी तुलना ईसा मसीह से नहीं की, अपनी गलतियों को स्वीकारा भी, लेकिन अपनी लोकप्रियता को भुनाया नहीं। अकूत धन जमा नहीं किया, द्वीप नहीं ख़रीदे, पाँच-सितारा आश्रम भी नहीं बनाये। अंग्रेजों के भारत छोड़ने का श्रेय भी नहीं लिया।
वकालत करने के बाद गाँधी बाबा ने 57 साल तक सार्वजनिक जीवन जिया। यहाँ 3-4 साल के आंदोलनकारी ख़ुद की बराबरी गाँधी बाबा से करना चाह रहे हैं। गाँधी बाबा ने बँटवारे के बाद के दंगों में न्यूटन को याद भी तो नहीं किया था। यह कैसा कलयुग है कि ख़ून के प्यासे ख़ुद की बराबरी महात्मा गाँधी से कर रहे हैं?
© सुशील कुमार
छवि साभार: https://www.facebook.com/Outlookindia

 

जमदाग्नि की अग्नि

Image

उस औरत का कुछ भी नाम हो सकता है
जैसे रेणुका, सीता या फिर बबिता
और उसका मरदूद आदमी?
उसका भी तो कुछ नाम हो सकता है
जैसे जमदाग्नि, राम या फिर कुछ और…
जिस पतनगामी औरत के पति ने उसे ज़िंदा जलाया
वो कौन था?
जमदाग्नि, राम या फिर कोई और?
उस औरत को किसने मारा?
धर्म ने या अधर्म ने?
या फिर किसी जमदाग्नि, राम या
किसी और पुरुष की ईर्ष्या ने
या फिर कोई और…

© सुशील कुमार

माफ़ी?

भाजपा ने माफ़ी माँगी!
तो क्या फिर कल से बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण शुरू होगा?
या फिर एक धक्का और दो…
अभी तो मथुरा, काशी भी बाकी है…
क्या मियाँ लोग कल से फिर से आगे से खाने लगेंगे?
और जो गुजरात में न्यूटन को कलंकित किया उसका क्या?
क्या सचमुच राजूनाथ बन गया जेंटलमैन?

© सुशील कुमार

चिदंबरम के नटराज मंदिर में एक मुस्लिम महिला अपने बच्चे के साथ

चिदंबरम के नटराज मंदिर में एक मुस्लिम महिला अपने बच्चे के साथ

Evolution of Vampires

Bhopal Union Carbide memorial, Image source: Wikipedia

Bhopal Union Carbide memorial, Image source: Wikipedia

When there was era of sword,
the cities were plundered,
temples looted,
men were treated as slaves,
women were raped
or made to live as concubines.
When gun powder was discovered,
swords were reduced to blade of grass,
colonies were established,
and sun never set on British Empire.
When Dynamite was discovered
mountains were razed to dust.
When satellites began
roaming in earth’s orbit,
villages and forests
were reduced to mines.
When nuclear bomb was dropped,
the humanity was choked by radiations.
When Auschwitz happened,
humanity was ashamed of being inhuman.
When Bhopal Gas tragedy struck in midnight,
thousands of poor Indians died a silent death,
dreaming the life of comfort and happiness,
when their souls awoke from grave,
they found politicians, Babus, Judges
laughing incessantly.
Few vampires,
were praying secretly for
Tsunamis,
earthquakes,
deluges,
industrial disasters
and wars,
to quench their
thirst for wealth.

© Sushil Kumar

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